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December 01, 2008
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राष्ट्रभक्ति ले हृदय, हो खडा यदि देश सारा । संकटो पर मात कर यह राष्ट्र विजयी हो हमारा ।।धृ।। क्या कभी किसीने सुना है सूर्य छिपता तिमिर भय से । क्या कभी सरिता रुकी है बांध से वन पर्बतों से । जो न रुकते मार्ग चलते चीर कर सब असूर दल को । वरण करती कीर्ति उनका तोड कर सब संकटो को । ध्येय मंदीर के पथिक को कंटकों का ही सहारा ।।१।। हम न रुकने को चले है, सूर्य के यदि पुत्र है तो । हम न हटने को चले है, सरीत् की यदि प्रेरणा तो । चरण अंगद ने रखा है आ इसे कोई उठाएँ । दहकता ज्वालामुखी यह आ इसे कोई बRead More

SANJAY PETHE's Blog

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